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माँ मेरा ख़याल रखती है

बदलती है ज़िन्दगी मगर वो नहीं बदलती है ,
मेरी माँ हर तरह से मेरा ख़याल रखती है ।

जब भी कोई बादल बरसा या सूरज मुस्काया है ,
मैंनें हर अरसा बस उसका ही आसरा पाया है ।

सर्दी – गर्मी , सूखा – बारिश ,
धूप – छाँव सब मैंने देखा ;
देखा सर पे साया उसका ,
जब भी सर उठाके देखा ।

अपने शीतल सायें से मुझको ढंकके रखती है ,
किसी छाते की तरह माँ मेरा ख़याल रखती है ।

मेरी कम उम्र नादानियों को दूर से ताकती है,
फिर तजुर्बों से बूढ़ी हुई आंखे वो मलती है,

पास अपने मुझे बिठाती ,
धीरे धीरे प्यार से बताती ;
नजर और नजरिये में ,
है क्या फ़र्क मुझे समझाती ।

मेरे दिल – ओ – दिमाग के शीशे साफ़ रखती है ,
मेरे चश्मों की तरह माँ मेरा ख़याल रखती है ।

हर वक़्त रहूँ मैं “वक़्त पे” बस यही अलार्म बजाती है ,
वक़्त सुनहरा वक़्त तुम्हारा हर वक़्त मुझे बतलाती है ।

काम सभी निपटाती जाती ,
पीछे छोड़ घड़ी के कांटे ;
आलू काटे चावल चढ़ाये ,
वो पिसती दाल और आटे ।

थामके मेरा हाथ हर वक़्त साथ चला करती है ,
मेरी घड़ी की तरह माँ मेरा ख्याल रखती है ।

चाहती है बेटा उसका अपने पैरों पे खड़ा हो जाये ,
चाहे ये भी कोई ठोकर कोई कंकर हाय ना लग जाये ।

चले – दौड़े , थके – रुके ,
सांस भरे और फिर चलदे ,
सीधे – सपाट , आड़े – टेढ़े ,
रास्तों से बचाये मेरे तलवे ।

रखने पाँव मुलायम मेरे खुरदरे चमड़े से लगी रहती है ,
मेरी जुराबों की तरह माँ मेरा ख़याल रखती है ।

एक सादे कपड़े का टुकड़ा बन जेब में मेरी रहती है ,
मैं अगर लूँ छींक – खाँस तो तुरंत बाहर निकलती है ।

महँगा – मामूली , सफेद – रंगीन ,
वैसे सबके पास ये होता है ;
बच्चा – बूढा , अमीर – गरीब ,
इसके बिना हर कोई रोता है ।

जब भी जाऊँ उलझ उंगलियों में खेला करती है ,
मेरे रुमाल की तरह माँ मेरा ख़याल रखती है ।

ज्ञान-विज्ञान , कला-शिक्षा का अखूट एक पिटारा है ,
जीवन का सब सार समेटा, न खोजा हुआ खजाना है ।

मीठी यादें , प्यारी बातें ,
किस्से कहानियाँ बाँध रखी है
अपने भीतर नादानियाँ मेरी
ग़लतियाँ भी तो छुपा रखी है ।

ख्वाहिशों और जरूरतों को मेरी समेटकर रखती है ,
किसी सूटकेस की तरह माँ मेरा ख़याल रखती है ।

ज़िन्दगी को ज़िन्दगी बनाये रखती है ,
मेरी माँ हर तरह से मेरा ख़याल रखती है ।

-“भावुक”

*I wrote this poem specially for Mother’s day, so please share it and wish you all Happy Mother’s day…

क्यूँकि माँ हमारा ख़याल रखती है ।

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OpenMic#1 : First of Ever

Hi world,

On 21st January 2018 , I attended My First open mic. It was “Pen, Poetry Mic – Season 3” presented by “Flashback stories”.Amazing experience where I got chance to read my own poem and listen other amazing poems. Different kinds of poems written by different kinds of people, were read. Every poem was worth to listen.

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Ode to ‘My FRIEND’

Ode to ‘My FRIEND’

O my dear friend,
Don’t ask who are you to me,
You are not the trouble maker
but trouble it self in a human form.
You are the one,
who bring troubles to me,
And then smash them like it is a fly,
O devil in a human form
Stop showing your non existing greatness to me.

O my buddy the dearest,
Stop pretending being cool,
You are just like me,
No more than a person of old-school.
You are the one who talks nineteen to the dozen,
And I am the one who voiced only words chosen.
Don’t you ever take pride on being angel in my life?
There were times you made devil feel ashamed with your vice.

However I am irritated with you
I can not omit our friendship is true.

O my dear friend,
Don’t ask that who are you to me,
You are not my everything,
but without you I enjoy nothing.
Never ever you dare to feel lonely,
As I am there to share your every agony and ecstasy
If you’ll go away for some time
I might not follow you or even ring a call,
But if you will tell me you’re dying.
I swear I’ll follow you even till the Hell.

Review :

Hi World!,

This is my first time ever I penned an English poem, as I have never imagined to write a one. In my office we had a competition of writing a blog on friendship as ‘Friendship Day’ was around. I wanted to take a part in it so tried to write something in my leisure time. This poem is written in so less time and in so hazard, I didn’t even thought it would turned out so nicely. To have an inspiration for this poem I just remembered few one of my ‘BFFs’ and started writing on until I was not came back from a memory lane. I guess that’s how I was able to do what I had never believed to do and that is to write a poem in English. Later I showed this to my friend who is an editor of the magazine published by office. She liked it and promised me to make it published in the coming edition. Which made me overwhelmed and crazily happy. I hope you all will like it…

– Sing & Smile : )

Full_of_Emotions A/K/A “EMO”